गुरुवार, 16 नवंबर 2023

सावित्रीबाई फुले जयंती)*

 12. *3 जनवरी : राष्ट्रीय महिला शिक्षक दिवस (सावित्रीबाई फुले जयंती)* 

 

*परिचय* 

सावित्रीबाई फुले एक शिक्षक, सुधारवादी, कवि और महिला अधिकारों के लिए नारीवादी आंदोलन की योद्धा थी। उन्होंने जाति और लिंग भेद के विरुद्ध लगातार लड़ाई लड़ी। उन्हें भारत की पहली महिला शिक्षक कहा जाता है। उन्होंने और उनके पति ज्योतिराव फुले ने भारत में सामान्य रूप से और महाराष्ट्र में विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों के संघर्ष में भूमिका निभाई। उन्होंने मिलकर 1848 में छात्राओं के लिए पहली आधुनिक स्कूल स्थापित किया।


सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा ज़िले के एक गांव में हुआ था। जब उनका विवाह ज्योतिराव फुले से हुआ तो उनकी आयु 10 वर्ष और उनके पति की 13 वर्ष थी। उनके बच्चे नहीं हुए परंतु उन्होंने यशवंतराव को गोद ले लिया जिसे उच्च जाति द्वारा त्याग दिया गया था क्योंकि उसका जन्म एक ब्राह्मण विधवा से हुआ था। 10 मार्च 1897 को बुबोनिक प्लेग की विश्वव्यापी तीसरी महामारी के समय पीड़ित रोगियों की देखभाल करते हुए उनकी मृत्यु हो गई।


विवाह के समय सावित्रीबाई निरक्षर थीं। उनके पति ने उन्हें पढ़ाया। अपने पति के अलावा सखाराम यशवंत परांजपे और केशव शिवराम भावलकर (जो उनके पति के मित्र थे) से भी उन्होंने शिक्षा ग्रहण की। फिर उन्होंने शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम में पहले पुणे नॉर्मल स्कूल और फिर अहमद नगर में एक अमेरिकी मिशनरी सिंथिया फर्रार में दाखिला लिया। गणित, भौतिकी और सामाजिक अध्ययन सभी पारंपरिक पश्चिमी पाठ्यक्रम का हिस्सा थे।


 *सावित्रीबाई की विरासत :* जिस प्रकार डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने समाज के उत्पीड़ित वर्ग के उत्थान के लिए कार्य किया, वैसा ही कार्य सावित्रीबाई ने लड़कियों की शिक्षा के क्षेत्र में किया। उन्होंने क्रांतिकारी नारीवादी सगुनाबाई क्षीरसागर की सहायता से पुणे के महरवाड़ा में लड़कियों को पढ़ाना शुरू किया। 1850 के दशक में उन्होंने कुल 18 स्कूल खोले जिनमें विभिन्न जातियों के बच्चे पढ़ते थे जिनमें बलात्कार पीड़िताओं के बच्चे भी थे। जब यह पता लगता था कि वह लड़कियों को शिक्षा दे रही हैं और उन बच्चों को भी जिनके पिता अज्ञात थे, तो उच्च वर्ण के धार्मिक लोग उन्हें गालियां देते, डांटते और उन पर पत्थर भी फेंकते थे। इन सब से बचने के लिए वह बुर्का पहनकर स्कूल जाती थीं और स्कूल पहुंचकर उतार देती थीं। वह कवि भी थीं जिन्होंने दबे-कुचले वर्ग का वर्णन अपनी कविताओं में किया है। उन्हें पहली पीढ़ी की आधुनिक भारतीय नारीवादियों में से एक के रूप में जाना जाता है जिन्होंने ब्रिटिश शासन के समय भारत में महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। 


उनकी जयंती हर साल 3 जनवरी को भारत में बालिका दिवस के रूप में मनाई जाती है। महिला शिक्षा के लिए उनकी सेवाओं के प्रति सम्मान के रूप में पूर्ववर्ती पुणे विश्वविद्यालय का नाम बदलकर 2015 में सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय कर दिया गया था। 


 *बालिका दिवस के उपलक्ष में एआईपीएसएन के कार्यक्रम :* 

1. सावित्रीबाई फुले पर पोस्टर बनाना; 

2. महिला शिक्षा के महत्त्व पर कार्यक्रम; 

3. 3 जनवरी को महिला शिक्षक दिवस के रूप में घोषित करने के लिए प्रयास/कार्यक्रम।

25 दिसंबर क्रिसमस

 11. *25 दिसंबर : क्रिसमस* 


 *प्रस्तावना :* 

नास्तिकों की तुलना में विश्व में आस्तिकों की संख्या अधिक है। यद्यपि किसी भी धर्म के गैर-विश्वासी (नास्तिक, अग्नोस्टिक, संशयवादी इत्यादि) दुनिया में दूसरे नंबर पर हैं। इस क्रम में इस्लाम और हिंदू धर्म के बाद ईसाई धर्म सबसे प्रचलित धर्म है। क्रिसमस दुनिया में उल्लास के साथ मनाया जाने वाला त्यौहार है। यीशु मसीह के जन्मदिन के प्रतीक के रूप में यह हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाता है। ईसाई धर्म की पुस्तक बाइबल में दिए नए नियम (न्यू टेस्टामेंट) के अनुसार यीशु का जन्म यूसुफ़ और मेरी के घर एक झोपड़ी में हुआ था। यीशु के जन्म वर्ष को ईसाई धर्म के कैलेंडर (ग्रेगोरियन कैलेंडर) के संदर्भ वर्ष के रूप में माना जाता है। जब हम कहते हैं कि यह 2023 ई. है तो इसका मतलब है कि यीशु का जन्म 2023 वर्ष पहले हुआ था। उनके जन्म के बाद के वर्षों को एडी और जन्म से पहले के वर्षों को बीसी लिखा जाता है। यदि हम कहें कि किसी राजा का भारत पर शासन 414 बीसी में था तो इसका अर्थ है कि उसका शासन यीशु के जन्म के 414 वर्ष पहले था। यद्यपि यह दिन ईसाइयों (दोनों - कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट) द्वारा उल्लास से मनाया जाता है परंतु दूसरे धर्म वाले भी इसे उनके साथ मनाते हैं और ईसाइयों को बधाई देते हैं। वेटिकन सिटी ईसाई धर्म का मुख्यालय है तथा इसके प्रमुख पोप को भगवान जोशुआ के राजदूत के रूप में माना जाता है। 


 *उत्सव :* 

ईसाई 25 दिसंबर से कई सप्ताह पहले सितारों के आकार की सजावट (ओरिगैमी) यीशु के जन्म के स्वागत के संकेत के रूप बनाते हैं। इस बड़े त्यौहार पर भारत सहित हर देश में छुट्टी होती है। युवा और बुजुर्ग सांता क्लॉज़ नामक बाइबल में वर्णित आकृति बनाते हैं। घरों तथा बाज़ारों में क्रिसमस ट्री बनाते हैं। उपहारों का आदान-प्रदान होता है। समस्त संसार के व्यापारियों के लिए यह लाभकारी अवसर होता है। 


यह त्यौहार लगभग हर शहर में मनाया जाता है, मुंबई, गोवा, दिल्ली, हैदराबाद, केरल में ज़्यादा। मिलन समारोह में स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं, गिरजाघरों को सजाया जाता है, गीत गाए जाते हैं। 


 *एआईपीएसएन की इस अवसर पर की जाने वाली गतिविधियां :* 

* सभी धर्मों के लोगों के साथ उत्सव में शामिल होना; 

* भारत की विविधता में एकता पर चर्चा; 

* भारत की धर्मनिरपेक्षता और उसके विरुद्ध खतरों पर चर्चा; 

* धर्मनिरपेक्ष ग्रीटिंग कार्ड्स का आदान-प्रदान।

 10. *22 दिसंबर : राष्ट्रीय गणित दिवस (रामानुजन की जयंती)* 


 *परिचय :* 

श्रीनिवास रामानुजन की जयंती 22 दिसंबर हर वर्ष राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाई जाती है। उनका जन्म 22 दिसंबर 1887 को कुंभकोणम तमिलनाडू में हुआ था और 33 वर्ष की आयु में 26 अप्रैल 1920 को बीमारी के कारण उनका असमय निधन हो गया था। विश्वविद्यालयीय शिक्षा के अभाव के बावजूद संख्या सिद्धांत, विभाजन फंक्शन, निरंतर अंशों, डाइवर्जेंट शृंखला के सिद्धांत, हाइपर ज्योमेट्रिक शृंखला आदि में उनके योगदान के कारण उन्हें विश्व की महानतम गणितीय प्रतिभाओं में से एक माना जाता है। 1909 में जानकी अम्मल से विवाह के बाद उन्होंने नेल्लोर के कलेक्टर के दफ़्तर में अकाउंटेंट के स्थायी पद के लिए आवेदन किया। ज़िला कलेक्टर श्री रामचंद्र राव उनके गणित के ज्ञान से बहुत प्रभावित हुए और उनके लिए मद्रास विश्वविद्यालय से छात्रवृत्ति और ट्रिनिटी कॉलेज कैंब्रिज से अनुदान की सिफ़ारिश की। रामानुजन ब्रिटिश गणितज्ञ जी. एच. हार्डी के साथ काम करने के लिए लंदन गए। 16 मार्च 1916 को रामानुजन ने कैंब्रिज से अनुसंधान द्वारा बीए (जिसे बाद में पीएचडी कहा गया) की उपाधि प्राप्त की।


 *विरासत :* 

जब वह 15 साल के थे तभी वह जॉर्ज शूब्रिज कैर द्वारा लिखित हजारों प्रमेयों को पढ़ और उनकी व्याख्या कर सकते थे तथा उन्होंने उस पुस्तक के अंतराल को भरने के लिए स्वयं भी नए प्रमेयों की रचना की। *धनात्मक पूर्णांकों के योग के रूप में एक धनात्मक पूर्णांक को व्यक्त करने की संख्या को संख्याओं का विभाजन कहा जाता है।* उदाहरण के लिए, 6 को 8 तरीकों से 6+0, 5+1, 4+2, 3+3, 4+1+1, 3+1+1+1, 2+1+1+1+1 और 1+1+1+1+1+1 के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। इस प्रकार 8, 6 की विभाजन संख्या है। इंग्लैंड में रामानुजन ने बड़ी संख्याओं के लिए संख्याओं का विभाजन प्राप्त करने में प्रगति की। इस विधि को अब रामानुजन योग कहा जाता है। उनके लेख बहुत प्रतिष्ठित गणितीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए थे। 1918 में उन्हें *रॉयल सोसाइटी ऑफ़ लंदन* के लिए चुना गया। 1729 के बारे में एक प्रसिद्ध कहानी है। यह उस टैक्सी का नंबर था जिसमें हार्डी दक्षिण लंदन के अस्पताल में उपचाराधीन रामानुजन से मिलने आए थे। जब हार्डी ने उन्हें बताया कि वह एक सुस्त टैक्सी नंबर 1729 से वहां आए थे तो रामानुजन ने कहा कि 1729 सुस्त संख्या नहीं है। यह सबसे कम पूर्णांक है जिसे दो पूर्णांकों के घनों के योग के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, अर्थात् 1729= 1³+12³  तथा 1729=9³+10³ . तब से उन सभी संख्याओं को जिन्हें दो अलग-अलग तरीकों से दो पूर्णांकों के घनों के योग के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, उन्हें *रामानुजन-हार्डी नंबर* या *टैक्सी-कैब नंबर* कहा जाता है। रामानुजन का कार्य इतना महत्त्वपूर्ण था कि विश्व प्रसिद्ध विज्ञान पत्रिका *नेचर* ने रामानुजन को उनकी मृत्यु के वर्ष (1920) के *कैलेंडर ऑफ़ साइंटिफ़िक पायनियर्स ऑफ़ एमिनेंस* में सूचीबद्ध किया।


 *एआईपीएसएन की इस अवसर पर की जाने वाली गतिविधियां :* 

* गणित के छात्रों के लिए प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं;

* रामानुजन की जीवनी पर चार्ट;

* आईटी इत्यादि की प्रगति में गणित की भूमिका पर व्याख्यान।

नोबेल पुरस्कार दिवस (अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि)*

 9. *10 दिसंबर : नोबेल पुरस्कार दिवस (अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि)* 


 *परिचय :* 

भौतिकी, रसायन विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य तथा विश्व शांति एवं अंतराष्ट्रीय सद्भाव के लिए व्यक्तियों/संगठनों को 1901 से दिया जाने वाला सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार नोबेल पुरस्कार है। 1969 से अर्थशास्त्र में भी यह पुरस्कार दिया जाने लगा है। 1895 में अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी वसीयत के माध्यम से कुछ पैसा अलग रखा  जिसके ब्याज से यह पुरस्कार उन लोगों/संस्थाओं को दिए जाते हैं जिन्होंने गत वर्ष में मानव जाति का सबसे अधिक उद्धार किया। यद्यपि पुरस्कार की घोषणा अक्तूबर मास में होती है, उसे 10 दिसंबर को अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर दिया जाता है। 


 *प्रतिष्ठा और विरासत :* 

इस पुरस्कार को जीतना बहुत प्रतिष्ठा का विषय है तथा किसी पेशेवर के लिए अंतर्राष्ट्रीय मान्यता के रूप में है। यह मरणोपरांत नहीं दिया जाता तथा साझा करने की अवस्था में अधिकतम व्यक्तियों को ही दिया जाता है। 


1901 से 1922 तक कुल 615 पुरस्कार घोषित किए गए हैं। भौतिकी में 116, रसायन विज्ञान में 114, जीव विज्ञान में 113, साहित्य में 115, शांति के लिए 103 और अर्थशास्त्र में 54 पुरस्कार दिए जा चुके हैं। कुल 989 व्यक्तियों (भौतिकी में 222, रसायन विज्ञान में 191, जीव विज्ञान में 225, साहित्य में 119, शांति के लिए 110 व्यक्तियों और 30 संगठनों, अर्थशास्त्र में 92) को यह पुरस्कार दिया गया। 61 महिलाओं को यह पुरस्कार मिला (भौतिकी में 4, रसायन विज्ञान में 8, जीव विज्ञान में 12, साहित्य में 17, शांति के लिए 18, अर्थशास्त्र में 2) जो कुल मिलाकर 6.167% है और विज्ञान में 3.762% (भौतिकी में 1.802%, रसायन विज्ञान में 4.188% और जीव विज्ञान में 5.333%) है। इस पुरस्कार की वेबसाइट से अन्य जानकारी ली जा सकती है। 


यद्यपि  इस पुरस्कार की कार्यवाही को निष्पक्ष माना जाता है फिर भी इस पर कुछ विवाद है। उदाहरण के लिए, महात्मा गांधी (शांति के लिए), रोज़लिंड फ्रेंकलिन (चिकित्सा क्षेत्र में), सत्येंद्र बोस और लीज़ मिटनर (भौतिकी के लिए) को पुरस्कार नहीं दिया गया जबकि समाजवाद विरोधी/अमरीका समर्थक लियू शियाबो (2010), हेनरी किरसिचर (1973), मिखाइल गौरबाच्योव (1990)को शांति पुरस्कार दिया गया। निराशाजनक है कि सी. वी. रमन (1930) के बाद 92 वर्षों से विज्ञान में किसी भी भारतीय को यह पुरस्कार नहीं मिला है।


 *एआईपीएसएन की इस अवसर पर की जाने वाली गतिविधियां :* 

* नोबेल पुरस्कार पर व्याख्यान का आयोजन; 

* भारत के संस्थानों की विश्व रैंकिंग कर चर्चा; 

* अनुसंधान पर सरकारी सहायता बढ़ाने के लिए हस्ताक्षर अभियान।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस*

 8. *10 दिसंबर : अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस* 


 *परिचय :* 

यदि मानव सभ्यता में संचार के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों, जैसे - विज्ञान तथा तकनीकी विकास की सहायता से अन्य अनेक क्षेत्रों में प्रगति देखी जा सकती है परंतु मानव के प्राकृतिक एवं वैध अधिकार लगातार खतरे में हैं और उनके खतरे अलग-अलग देश में अलग-अलग स्तर के हैं। समानता और गैर-भेदभाव का सिद्धांत मानव अधिकारों के मूल में है। समानता का भाव संयुक्त राष्ट्र संघ के 2030 के एजेंडे से जुड़ा हुआ है तथा यू एन का घोषित दृष्टिकोण है : *"किसी को पीछे नहीं छोड़ने का साझा ढांचा : सतत विकास के केंद्र में समानता और गैर-भेदभाव।"* समानता, समावेश और गैर-भेदभाव के सिद्धांतों पर चलते हुए हम 2030 के एजेंडे को साकार कर सकते हैं। यह दिवस लोगों में उनके सामाजिक, सांस्कृतिक और शारीरिक अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और उनके कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए मनाया जाता है। 


 *महत्त्व :* 

यह दिवस हर साल 10 दिसंबर को मनाया जाता है। 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र संघ ने मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा को अपनाया था। यह उन अधिकारों की बात करता है जिसका हकदार दुनिया का हर व्यक्ति है, *चाहे वह किसी भी जाति, रंग, धर्म, लिंग, भाषा, राजनीतिक या अन्य विचारधारा, राष्ट्रीय अथवा सामाजिक मूल, संपत्ति, जन्म या किसी अन्य स्थिति का क्यों न हो।* 2023 का अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस का विषय 'सभी के लिए गरिमा, स्वतंत्रता और न्याय' है, जो 2022 में भी था। 


असहिष्णुता की बढ़ती घटनाओं के कारण देश में स्वतंत्रता, लोकतंत्र, विविधता में एकता, सांप्रदायिक सद्भाव, तर्कसंगतता आदि खतरे में हैं। यद्यपि दावा किया जा रहा है कि हम विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन रहे हैं परंतु अमीर-गरीब की खाई लगातार बढ़ रही है। मानव विकास सूचकांक, औसत खाद्य खपत, शिक्षा और स्वास्थ्य, आवास और रोज़गार, विज्ञान, शिक्षा आदि तक लोगों की पहुंच कम हो रही है। कुछ सौ कुलीन घराने अरबपति बन गए हैं जबकि कई करोड़ भारतीय जनता गरीबी रेखा से नीचे चली गई है। शिक्षा का अधिकार, जीवन का अधिकार और रोज़गार का अधिकार मुश्किल से मिल पा रहे हैं। रूढ़िवादी, निराधार और नकली ऐतिहासिक विषयों को झूठी वैज्ञानिक सामग्री के साथ पाठ्यक्रम में जोड़ा जा रहा है जिससे युवा पीढ़ी में वैज्ञानिक स्वभाव की कमी होने का भय है।


 *एआईपीएसएन की गतिविधियां :* 

* मानवाधिकारों पर मंडरा रहे खतरों पर पर्चे का विमोचन; 

* सतत विकास विषय पर चर्चा;

* 2023 के थीम *'सभी के लिए गरिमा, स्वतंत्रता और न्याय'* पर प्रदर्शन;

* नि:शुल्क शिक्षा एवं स्वास्थ्य के लिए हस्ताक्षर अभियान; 

* सांप्रदायिक सद्भाव और विविधता में एकता के लिए जुलूस।

डॉ. बी. आर. अंबेडकर की पुण्यतिथि*

 7. 6 *दिसंबर : डॉ. बी. आर. अंबेडकर की पुण्यतिथि* 


 *परिचय* 

 *भारत रत्न भीमराव रामजी अंबेडकर* जिन्हें सम्मानपूर्वक भारत के महान संविधान की पटकथा के रचयिता का पर्याय माना जाता है, का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में एक गरीब परिवार में तथा एक ऐसी जाति में हुआ जिसे निम्नतम माना जाता था। कठिनाइयां, गरीबी तथा अन्य सामाजिक बाधाओं के बावजूद उन्होंने विश्वविद्यालय की शिक्षा प्राप्त की तथा 1917 में कोलंबिया विश्वविद्यालय, न्यूयॉर्क (अमेरिका) से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। 1935 में उनकी पत्नी रमाबाई का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। अस्वस्थ होने के कारण वे इलाज के लिए मुंबई गए जहां उनकी मुलाकात शारदा कबीर से हुई जिससे उन्होंने 15 अप्रैल 1948 को विवाह किया क्योंकि डॉक्टरों ने कहा था कि उन्हें एक साथी की आवश्यकता है। *6 दिसंबर 1956 को* दिल्ली में अपने निवास पर सोते हुए उनका *निधन* हो गया। सविता अंबेडकर तथा उनके पुत्र यशवंत अंबेडकर ने उनके द्वारा शुरू किए गए सामाजिक-धार्मिक (बौद्ध) आंदोलन को आगे बढ़ाया। 


 *सक्रियता* 

वे भारत में जाति व्यवस्था के उन्मूलन के आजीवन सेनानी रहे। उनका जीवन संघर्षों एवं सामाजिक सुधारों के लिए समर्पित था। महात्मा गांधी के साथ उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भी भाग लिया तथा स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद वे *देश के प्रथम कानून मंत्री* बने तथा *देश के संविधान को आकार दिया।उन्हें पितृसत्ता के विरुद्ध संघर्ष के लिए, संपत्ति संबंधों के पुनर्गठन के लिए, ब्रिटिश उपनिवेशवाद के विरुद्ध संघर्ष के लिए तथा दलितों के राजनीतिक उद्धार के लिए जाना जाता है।* उन्होंने उत्पीड़ित और दबे-कुचले लोगों को प्रेरित किया तथा उन्हें ऐतिहासिक रूप से सर्वश्रेष्ठ सामाजिक नारा *"शिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित रहो!"* दिया। उन्होंने शिक्षा को उत्पीड़न से मुक्ति का साधन बताया। शिक्षा प्राप्त कर, भेदभावपूर्ण सामाजिक बेड़ियों 

को तोड़कर एक समतावादी और उत्पीड़न-मुक्त समाज का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने सभी बहुजन के लिए शैक्षिक और नौकरी के अवसरों में आरक्षण को शामिल करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें *आधुनिक भारत का दूरदर्शी वास्तुकार* माना जाता है। 2012 में सीएनएन आईबीएन द्वारा आयोजित एक सर्वेक्षण में अंबेडकर को पटेल और नेहरू से बढ़कर *महानतम भारतीय* चुना गया। अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार विजेता *अमर्त्य सेन* ने उन्हें *अपने अर्थशास्त्र का जनक* बताया था और कहा था कि *'अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उनका योगदान अद्भुत है।'* ऐसी मान्यता है कि कार्ल मार्क्स की तरह उन्होंने भी ब्रिटिश लाइब्रेरी की लगभग सभी पुस्तक पढ़ीं। भारत में शायद ही कोई ऐसा शहर हो जहां उनकी मूर्ति न हो। 

एआईपीएसएन 6 दिसंबर को उनकी पुण्यतिथि पर उनकी तर्कसंगत, उदार, मुक्तिदायक और भेदभाव के विरुद्ध लड़ने की भावना के लिए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता है और उन्हें याद करता है। 


 *एआईपीएसएन की गतिविधियां :* 

* डॉ. अंबेडकर की प्रासंगिकता पर पर्चे का विमोचन; 

* संविधान संशोधन की फासीवादी प्रवृत्तियों के विरुद्ध जुलूस; 

* जाति और भेदभाव उन्मूलक विषयों पर वार्ता इत्यादि।

जवाहरलाल नेहरू जयंती*

 6. *14 नवंबर : जवाहरलाल नेहरू जयंती* 


 *परिचय* 

पंडित जवाहरलाल नेहरू (जिन्होंने सबसे ज़्यादा समय 1947-1964 तक भारत के प्रधानमंत्री का दायित्व निभाया) का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में श्री मोतीलाल नेहरू तथा श्रीमती स्वरूप रानी के घर हुआ था। उन्होंने ट्रिनिटी कॉलेज, कैंब्रिज से विज्ञान में ऑनर्स की डिग्री तथा इनर टेंपल, लंदन से कानून की डिग्री प्राप्त की। 1916 में उनका विवाह कमला कौल से हुआ तथा उनकी एकमात्र संतान इंदिरा प्रियदर्शिनी का जन्म 1917 में हुआ। नेहरू जी 1916 में महात्मा गांधी से मिले और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से शामिल हो गए तथा अनेक वर्षों तक जेल में रहे। 15 अगस्त 1947 को देश के स्वतंत्र होने के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री बने और भारत में औद्योगीकरण, आधुनिक शिक्षा के माध्यम से धर्मनिरपेक्ष, वैज्ञानिक और समतावादी प्रवृत्तियों की शुरुआत करने की कोशिश की। भारत तब तक ब्रिटिश शासन के अंतर्गत शोषण पर आधारित, अधिकतर सामंती, अंधविश्वासी और आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ उपनिवेश मात्र था। उन्होंने कई सामाजिक सुधार किए। अंतरराष्ट्रीय सहयोग से उन्होंने शुरुआती आईआईटी, आईआईएम, आईआईएससी, सीआईआर आदि प्रयोगशालाएं, आरईसी (वर्तमान में एनआईटी), इसरो, बीएआरसी इत्यादि की स्थापना की। उनकी हत्या का 6 बार प्रयास किया गया जिसमें एक प्रयास 1955 में सीआईए द्वारा भी किया गया था। फिर भी वे भारत की प्रगति के लिए दृढ़संकल्प रहे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि *भारत को लोकतंत्र, समाजवाद, एकता और धर्मनिरपेक्षता के चार स्तंभों को अपनाने की आवश्यकता है।* उन्हें *एक राजनेता तथा वैज्ञानिक स्वभाव की मुखर आवाज़ के रूप में जाना जाता है।* वैज्ञानिक स्वभाव पर उन्होंने अपनी पुस्तक *भारत एक खोज* में लिखा है, *"वैज्ञानिक स्वभाव.......वैज्ञानिक दृष्टिकोण, विज्ञान का साहसी और अभी तक का आलोचनात्मक स्वभाव सत्य और नए ज्ञान की खोज, परीक्षण और परीक्षण के बिना कुछ भी स्वीकार न करने की इच्छा, नए सबूत के सामने पिछले निष्कर्ष को बदलने की क्षमता, देखे गए तथ्य पर निर्भरता (न कि पूर्व कल्पित सिद्धांत पर भरोसा) के अतिरिक्त कुछ नहीं है।"* उनके इन्हीं विचारों से प्रभावित होकर संसद ने भारतीय संविधान में कुछ सूक्ष्म संशोधन किए जिनमें *धर्मनिरपेक्ष तथा समाजवादी शब्दों को जोड़ना तथा अनुच्छेद 151ए(एच) भारतीय नागरिकों के मौलिक कर्तव्य में वैज्ञानिक स्वभाव, मानवतावाद तथा जांच एवं सुधार की भावना का विकास जोड़ा गया।* 27 मई 1964 को उनके देहांत के बाद विश्व के अनेक नेताओं ने उनकी विरासत को श्रद्धांजलि दी। 1955 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान *भारत रत्न* से सम्मानित किया गया। उनका जन्मदिन 14 नवंबर हर वर्ष *बाल दिवस* के रूप में मनाया जाता है।

 

 *14 नवंबर को की जाने वाली गतिविधियां :* 

* पंडित नेहरू की प्रासंगिकता पर पर्चा निकालना; 

* बच्चों की प्रतियोगिताएं; 

* वैज्ञानिक स्वभाव पर वार्ता/गोष्ठी।