गुरुवार, 16 नवंबर 2023

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस*

 8. *10 दिसंबर : अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस* 


 *परिचय :* 

यदि मानव सभ्यता में संचार के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों, जैसे - विज्ञान तथा तकनीकी विकास की सहायता से अन्य अनेक क्षेत्रों में प्रगति देखी जा सकती है परंतु मानव के प्राकृतिक एवं वैध अधिकार लगातार खतरे में हैं और उनके खतरे अलग-अलग देश में अलग-अलग स्तर के हैं। समानता और गैर-भेदभाव का सिद्धांत मानव अधिकारों के मूल में है। समानता का भाव संयुक्त राष्ट्र संघ के 2030 के एजेंडे से जुड़ा हुआ है तथा यू एन का घोषित दृष्टिकोण है : *"किसी को पीछे नहीं छोड़ने का साझा ढांचा : सतत विकास के केंद्र में समानता और गैर-भेदभाव।"* समानता, समावेश और गैर-भेदभाव के सिद्धांतों पर चलते हुए हम 2030 के एजेंडे को साकार कर सकते हैं। यह दिवस लोगों में उनके सामाजिक, सांस्कृतिक और शारीरिक अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और उनके कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए मनाया जाता है। 


 *महत्त्व :* 

यह दिवस हर साल 10 दिसंबर को मनाया जाता है। 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र संघ ने मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा को अपनाया था। यह उन अधिकारों की बात करता है जिसका हकदार दुनिया का हर व्यक्ति है, *चाहे वह किसी भी जाति, रंग, धर्म, लिंग, भाषा, राजनीतिक या अन्य विचारधारा, राष्ट्रीय अथवा सामाजिक मूल, संपत्ति, जन्म या किसी अन्य स्थिति का क्यों न हो।* 2023 का अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस का विषय 'सभी के लिए गरिमा, स्वतंत्रता और न्याय' है, जो 2022 में भी था। 


असहिष्णुता की बढ़ती घटनाओं के कारण देश में स्वतंत्रता, लोकतंत्र, विविधता में एकता, सांप्रदायिक सद्भाव, तर्कसंगतता आदि खतरे में हैं। यद्यपि दावा किया जा रहा है कि हम विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन रहे हैं परंतु अमीर-गरीब की खाई लगातार बढ़ रही है। मानव विकास सूचकांक, औसत खाद्य खपत, शिक्षा और स्वास्थ्य, आवास और रोज़गार, विज्ञान, शिक्षा आदि तक लोगों की पहुंच कम हो रही है। कुछ सौ कुलीन घराने अरबपति बन गए हैं जबकि कई करोड़ भारतीय जनता गरीबी रेखा से नीचे चली गई है। शिक्षा का अधिकार, जीवन का अधिकार और रोज़गार का अधिकार मुश्किल से मिल पा रहे हैं। रूढ़िवादी, निराधार और नकली ऐतिहासिक विषयों को झूठी वैज्ञानिक सामग्री के साथ पाठ्यक्रम में जोड़ा जा रहा है जिससे युवा पीढ़ी में वैज्ञानिक स्वभाव की कमी होने का भय है।


 *एआईपीएसएन की गतिविधियां :* 

* मानवाधिकारों पर मंडरा रहे खतरों पर पर्चे का विमोचन; 

* सतत विकास विषय पर चर्चा;

* 2023 के थीम *'सभी के लिए गरिमा, स्वतंत्रता और न्याय'* पर प्रदर्शन;

* नि:शुल्क शिक्षा एवं स्वास्थ्य के लिए हस्ताक्षर अभियान; 

* सांप्रदायिक सद्भाव और विविधता में एकता के लिए जुलूस।

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