3. *2 दिसंबर : भोपाल गैस त्रासदी दिवस*
*भोपाल गैस त्रासदी का परिचय :*
विश्व की सबसे भीषण औद्योगिक त्रासदियों में गिनी जाने वाली भोपाल गैस त्रासदी *2 दिसंबर 1984 की रात* को भोपाल में यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के कीटनाशक संयंत्र में घटित हुई जिसमें *लगभग 4000 लोगों की मृत्यु* हो गई थी। अभी तक वहां के लोग गंभीर चोटों तथा अन्य स्वास्थ संबंधी समस्याओं से ग्रस्त हैं। यह एक ऐसा संयंत्र था जो अन्य रसायनों के अतिरिक्त कीटनाशक सेविन (कार्बारिल) बनाता था। इस रसायन के निर्माण में एक अत्यधिक विषाक्त और बहुत खतरनाक मिथाइल आइसोसाइनेट नामक तत्त्व का प्रयोग होता है। *यह गैस उक्त रात को अपने 3 कंटेनरों में से एक (ई 610) से लीक हो गई जिससे सुबह होते-होते हज़ारों लोग मारे गए।*
*मुख्य बातें :*
1. ज़हरीले मिथाइल आइसोसाइनेट के रख-रखाव में सुरक्षा मानदंडों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया।
2. कंटेनर ई 610 की क्षमता 30 टन की थी परंतु उसमें 42 टन (लगभग 40% अधिक) रसायन रखा गया था जिसमें से 40 टन पूरी तरह से लीक हो गया।
3. खराब रख-रखाव के कारण कंटेनर में पानी का रिसाव हुआ जिस कारण से ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया हुई जिससे लगातार रिसाव होता रहा।
4. तीन सुरक्षा प्रणालियां प्रशीतक, भट्ठियां तथा स्क्रबर या तो काम नहीं कर रहे थे या कम काम कर रहे थे।
5. हवा का बहाव झुग्गियों की ओर होने के कारण वहां काफ़ी नुकसान हुआ।
6. खांसी, घुटन, आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी इत्यादि मुख्य लक्षण थे।
7. भारत सरकार ने संस्था के विरुद्ध मुकदमा कर हर्जाने के 3.3 अरब डॉलर की मांग की परंतु संस्था ने मांग का केवल 15% (4700 लाख डॉलर) का ही भुगतान किया। 8. संस्था के अध्यक्ष वॉरेन एंडरसन को अमेरिका वापिस आने की अनुमति दे दी गई और बाद में 'अनुरोध' के बावजूद भी उन्हें प्रत्यर्पित नहीं किया गया।
9. कुछ अमेरिकी शोधकर्ताओं ने तोड़फोड़ की आशंका तथा रसायनिक युद्ध हथियार के रूप में एमआईसी की प्रभावकारिता की जांच करने के लिए अपना शोध प्रस्तुत किया।
10. भोपाल गैस त्रासदी बहुराष्ट्रीय निगमों और निजी पूंजीपतियों के हाथ में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग की ओर संकेत करती है।
*इस अवसर पर की जा सकने वाली गतिविधियां :*
* औद्योगिक कार्यों में सुरक्षा की अनदेखी से उत्पन्न होने वाले खतरों पर लेख लिखना;
* सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में औद्योगिक संचालन पर वाद-विवाद प्रतियोगिताएं;
* घोर पूंजीवाद तथा राजनीति और औद्योगिक दिग्गजों की मिलीभगत पर कार्यक्रम;
* औद्योगिक त्रासदियों पर नाटक, कविताएं, पोस्टर इत्यादि तैयार करना;
* चार्ट प्रदर्शनी;
* मानव निर्मित त्रासदियों में होने वाली निर्दोष मौतों का शोक और मौन जुलूस।
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