गुरुवार, 16 नवंबर 2023

सर सी. वी. रमन

 1.  *7 नवंबर : सर सी. वी. रमन की जयंती* 


 *जीवन परिचय :* 

सर सी. वी. रमन का जन्म 7 नवंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली नामक स्थान पर हुआ। उन्होंने 18 वर्ष की आयु में मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज से सन् 1906 में स्वर्ण पदक के साथ स्नातकोत्तर परीक्षा पास की। उनका विवाह उनकी बचपन की मित्र लोक सुंदरी से हुआ। कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आशुतोष मुखर्जी ने 1917 में उन्हें एक संकाय पद देने का प्रस्ताव दिया था। रमन बहुत मेधावी थे। उनकी यह जानने की जिज्ञासा थी कि आसमान नीला क्यों दिखता है; हिमनदी दूधिया/अपारदर्शी क्यों दिखती है; तथा संगीत की विभिन्न ध्वनियां कैसे निकलती हैं। अपने विद्यार्थी कृष्णन के सहयोग से किए गए शोध जिसे कोलकाता में इंडियन एसोसिएशन फ़ॉर कल्टीवेशन ऑफ़ साइंस में किया गया, के परिणाम स्वरूप *28 फ़रवरी 1928 को 'रमन प्रभाव' की खोज हुई जिसके लिए 1930 में उन्हें भौतिकी में नोबेल पुरस्कार दिया गया* जो विज्ञान के क्षेत्र में किसी भारतीय को पहले और अब तक का इकलौता पुरस्कार है। उन्हें सर की उपाधि प्रदान की गई तथा वे भारत से पहले एफ़आरएस बने। *1 नवंबर 1970 को उनकी मृत्यु* हुई। 


रमन जीवनपर्यंत संशयवादी बने रहे। वे कहते थे, *"कोई जन्नत नहीं है, स्वर्ग नहीं है, नर्क नहीं है, पुनर्जन्म नहीं है और न ही कोई अमरता है। जो एकमात्र सत्य है, वह है कि मनुष्य का जन्म होता है, वह जीता है और मर जाता है। इसलिए उसे अपना जीवन ठीक से जीना चाहिए।"* 


 *रमन प्रभाव :* 

प्रकाश की आवृत्तियों की सीमा (जिसे मानव अपनी आंख से देख सकता है) को सात रंगों वी-आई-बी-वाई-ओ-आर के साथ विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम की दृश्य सीमा कहा जाता है। एक अद्वितीय आवृत्ति (unique frequency) वाले विकिरण को मोनोक्रोमेटिक विकिरण कहा जाता है। रमन प्रभाव की खोज से पहले वैज्ञानिक समुदाय का विचार था कि किसी भी वस्तु पर एक मोनोक्रोमेटिक विकिरण रेले स्कैटरिंग द्वारा आवृत्ति में बिना किसी बदलाव के बिखर जाती है। यद्यपि रमन ने तरल बेंज़ीन द्वारा बिखरे हुए एक मोनोक्रोमेटिक विकिरण का उपयोग किया, उन्होंने घटित आवृत्तियों के ऊपर और नीचे नई आवृत्तियों की खोज की। मोनोक्रोमेटिक प्रकाश के रेले स्कैटरिंग के अतिरिक्त अन्य आवृत्तियों में बिखरने को रमन प्रभाव कहते हैं। रमन प्रभाव को अब अणुओं के संरचनात्मक स्पष्टीकरण और खगोलीय अनुप्रयोगों में काफ़ी प्रयोग किया जाता है। *रमन प्रभाव की खोज के दिन को, यानी 28 फ़रवरी को, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है।* 


 *एआईपीएसएन की इस अवसर पर की जाने वाली गतिविधियां :* 

* चार्ट बनाकर जीवनी पर आधारित प्रदर्शनी; 

* रमन प्रभाव पर व्याख्यान; 

* छात्रों के लिए वाद-विवाद एवं निबंध लेखन प्रतियोगिताएं।

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